
गिरिडीह सदर अस्पताल से एक अहम तस्वीर सामने आ रही है।जहां स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कहे जाने वाले आउटसोर्सिंग कर्मी पिछले 16 जनवरी से लगातार धरने पर बैठे हुए हैं।ये वही कर्मचारी हैं जो मरीजों की सेवा में दिन-रात लगे रहते हैं,लेकिन आज खुद इंसाफ के लिए सड़क पर बैठने को मजबूर हैं।यह धरना चल रहा है JLKM – झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के बैनर तले,जहां कर्मी अपनी जायज मांगों को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांग रहे हैं।धरनारत कर्मियों का कहना है किउन्हें समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा,कई-कई महीनों का मानदेय बकाया है,काम स्थायी कर्मचारियों जितना,लेकिन अधिकार नाम मात्र के।आज इसी धरने को समर्थन देनेJLKM सुप्रीमो टाइगर जयराम महतोखुद गिरिडीह सदर अस्पताल पहुंचे।धरना स्थल पर पहुंचते हीटाइगर जयराम महतो नेधरने पर बैठे कर्मचारियों से सीधी बातचीत की।एक-एक समस्या को गंभीरता से सुना,और कहा कि यह सिर्फ वेतन की लड़ाई नहीं,बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई है।धरनारत कर्मियों ने बताया किआउटसोर्सिंग के नाम परउनका शोषण किया जा रहा है।ना भविष्य की सुरक्षा,ना स्थायित्व,और ना ही सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का पूरा लाभ।मौके पर मौजूद रहते हुएJLKM सुप्रीमो टाइगर जयराम महतो नेस्वास्थ्य विभाग के मंत्री औरविभागीय पदाधिकारियों सेफोन कॉल के जरिए सीधी बातचीत भी की।फोन पर जयराम महतो ने साफ शब्दों में कहा किजो कर्मचारी अस्पताल को चलाते हैं,अगर वही परेशान होंगेतो स्वास्थ्य व्यवस्था कैसे चलेगी।उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया किआखिर कब तकआउटसोर्सिंग कर्मियों कोउनका हक मिलने का इंतजार करना पड़ेगा।टाइगर जयराम महतो ने चेतावनी देते हुए कहा किअगर जल्द से जल्दइन कर्मचारियों की मांगों परठोस फैसला नहीं लिया गया,तो यह आंदोलनसिर्फ गिरिडीह तक सीमित नहीं रहेगा।उन्होंने कहा किJLKM जरूरत पड़ी तोइस आंदोलन कोजिला स्तर से उठाकरराज्य स्तर तक ले जाएगी।धरना स्थल परJLKM सुप्रीमो की मौजूदगी औरमंत्री–अधिकारियों से सीधी बातचीत के बादधरनारत कर्मियों मेंनया जोश और उम्मीद देखने को मिली।कर्मियों का कहना है किअब उन्हें भरोसा हैकि उनकी आवाजसरकार तक जरूर पहुंचेगी।स्थानीय लोगों का भी कहना है किअगर अस्पताल के कर्मचारी हीतनाव और अन्याय में रहेंगे,तो इसका सीधा असरमरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।फिलहाल,गिरिडीह सदर अस्पताल में आउटसोर्सिंग कर्मियों का धरना जारी है।अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार इस आंदोलन कोकितनी गंभीरता से लेती हैऔर कब तक इन कर्मचारियों कोउनका हक मिलता है।

