जनसेवा के प्रतीक दिवंगत मुंशी महतो को हजारों का सलाम — चौथी पुण्यतिथि पर उमड़ी भीड़

गिरिडीह जिले के बेंगाबाद प्रखंड स्थित भल्कूदर पंचायत में दिवंगत पूर्व मुखिया एवं सामाजिक न्याय के पुरोधा मुंशी महतो की चौथी पुण्यतिथि बड़े ही श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर हजारों लोग दूर-दूर से पहुंचकर अपने प्रिय नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए उमड़ पड़े। भारी भीड़ और जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि आज भी मुंशी महतो लोगों के दिलों में बसते हैं।
गरीब और शोषितों की आवाज थे मुंशी महतो
मुंशी महतो अपने समय में उन चुनिंदा जनप्रतिनिधियों में से थे, जिन्होंने बिना किसी दिखावे के हजारों गरीब और वंचित परिवारों के लिए संघर्ष किया। उस समय भल्कूदर पंचायत पुर्री पंचायत के नाम से जाना जाता था, और वहीं से उन्होंने जनसेवा की शुरुआत की।
गरीबों के अधिकारों की लड़ाई हो, पंचायत स्तर पर विकास कार्य हो, या सामाजिक न्याय का सवाल—मुंशी महतो हर जरूरत पर सबसे आगे खड़े दिखाई देते थे।उनकी सबसे बड़ी पहचान यह थी कि गांव-समाज के छोटे-बड़े विवादों को वे स्वयं सुलझा देते थे, जिससे गांव के लोग बहुत कम ही पुलिस-थाने के चक्कर काटते थे। लोगों ने उन्हें प्यार से “न्यायाधीश” की उपाधि भी दी।
राजनीति में भी रहे केंद्र बिंदु
गांडेय विधानसभा की राजनीति में भी मुंशी महतो एक प्रभावशाली और निर्णायक चेहरा रहे।
किसी भी राजनैतिक दल के प्रत्याशी को विधायक बनने से पहले उनका आशीर्वाद लेना अनिवार्य माना जाता था।
उन्हें पंचायत और प्रखंड की राजनीति का मजबूत स्तंभ कहा जाता है।
परिवार आज भी जारी रखे है उनकी विरासत
मुंशी महतो के निधन के बाद भी उनके कार्यों और आदर्शों की छाप लोगों के दिलों में कायम है।
इसी का परिणाम है कि आज उनका परिवार भी जनसेवा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है—
उनकी पुत्रवधु लगातार 3 बार जिला परिषद सदस्य चुनी गईं।
पुत्र रामप्रसाद यादव दो बार पंचायत समिति सदस्य तथा एक बार बेंगाबाद के प्रखंड प्रमुख रहे हैं।
यह दर्शाता है कि मुंशी महतो द्वारा किए गए विकास कार्यों और लोगों से उनके अपनत्व का प्रभाव आज तक जीवित है।
चौथी पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मुंशी महतो जैसे नेता समाज में विरले ही होते हैं।
उन्होंने जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर सभी के लिए काम किया।
सभी ने मिलकर संकल्प लिया कि उनके दिखाए रास्ते पर चलकर समाज को और मजबूत बनाया जाएगा।
अंत में
मुंशी महतो भले आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विचारधारा, संघर्ष, और जनसेवा का इतिहास हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
उनकी चौथी पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब यह बताने के लिए काफी है कि सच्चा जननेता कभी मरता नहीं—वह लोगों के दिलों में जीवित रहता है।

