20 सितंबर की शाम, भारी बारिश के कारण गिरिडीह गांधी चौक पर एक मासूम बच्चा नाले में बह गया। पूरे शहर का माहौल मातम और आक्रोश से भर गया। प्रशासन और नगर पालिका की टीमें 16 घंटे तक राहत कार्य का ढोंग करती रहीं, लेकिन नाकामी ही हाथ लगी।
इसी बीच जनता जनार्दन ने साबित किया कि असली ताकत जनता में ही है। झरिया गाड़ी के निवासी मोहम्मद रियाज़, मोहम्मद वारिस और योगेंद्र कारण ने निस्वार्थ भाव से अपनी जान की परवाह किए बिना खोजबीन में जुटकर उस मासूम बच्चे को ढूंढ निकाला।
इन वीरों ने न सिर्फ इंसानियत की मिसाल पेश की, बल्कि हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की एक अनोखी तस्वीर भी पूरे समाज के सामने रखी। उन्होंने साबित कर दिया कि धर्म और जाति से ऊपर उठकर इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।
इन चारों जांबाज़ शेरों को दिल से धन्यवाद और आभार है, जिन्होंने भ्रष्ट सत्ता और खोखली व्यवस्था की पोल खोलकर जनता के बीच यह सच्चाई ला दी कि—
“जनता जब जागती है तो असंभव भी संभव हो जाता है।”
गिरिडीह के ये वीर केवल एक मासूम की खोज में ही सफल नहीं हुए, बल्कि उन्होंने पूरे समाज को यह संदेश दिया कि अगर हम सब मिलकर खड़े हों तो भ्रष्टाचार, लापरवाही और तानाशाही जैसी हर ताकत को मात दी जा सकती है।
जनता की ओर से इन चारों जांबाज़ों को शत-शत नमन और सलाम।
