
गिरिडीह | पीरटांड़ थाना क्षेत्रझारखंड के गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत पांडेयडीह में शनिवार शाम करीब 6:30 बजे हुए दर्दनाक सड़क हादसे में कुल 6 लोग घायल हो गए। घायलों में एक महिला, एक छोटी बच्ची और दो पुरुष समेत अन्य लोग शामिल हैं, जो सड़क किनारे गंभीर हालत में पड़े थे।एम्बुलेंस नहीं पहुंची, सड़क पर तड़पते रहे घायलहादसे के बाद मौके पर भारी भीड़ जुट गई। स्थानीय लोग और राहगीर लगातार एम्बुलेंस सेवा 108 पर कॉल करते रहे, लेकिन काफी देर तक कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला।

इस दौरान घायलों की हालत बिगड़ती जा रही थी और लोग बेबस नजर आ रहे थे।इसी बीच “समाधान इंडिया नेटवर्क” की टीम, जिसमें हेड विकाश यादव भी मौजूद थे, शादी समारोह में जाते वक्त मौके पर पहुंची और तुरंत घायलों की मदद में जुट गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीरटांड़ थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह को फोन किया गया। उन्होंने तुरंत कॉल रिसीव किया और महज दो मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गए।बताया जा रहा है कि उस समय वे राज्यसभा सांसद डॉ. सरफराज अहमद को स्कॉर्ट कर रहे थे।प्रोटोकॉल तोड़कर पहले इंसानियत को चुना । थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ने VIP प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए अपनी गाड़ी रोकी और बिना देर किए पुलिस वाहन से घायलों को अस्पताल भिजवाया। उनके पीछे ही राज्यसभा सांसद का काफिला मौजूद था, लेकिन उन्होंने पहले इंसान की जान को प्राथमिकता दी।यह कदम मौके पर मौजूद लोगों के लिए एक बड़ी मिसाल बन गया।रॉकी नवल ने भी निभाई अहम भूमिका सामाजिक कार्यकर्ता सह शिक्षक रॉकी नवल ने भी मानवता का परिचय देते हुए घायलों की मदद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे लगातार राहत कार्य में जुटे रहे और लोगों को संभालते रहे।मदद के दौरान विकाश यादव को भी लगी टक्कर घटना के दौरान जब “समाधान इंडिया नेटवर्क” के हेड विकाश यादव घायलों की मदद कर रहे थे, तभी भीड़ और अव्यवस्था के बीच पीछे से आ रही एक मोटरसाइकिल ने उन्हें टक्कर मार दी।हालांकि इस घटना में उन्हें गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन यह घटना मौके पर मौजूद अव्यवस्था और सुरक्षा की कमी को उजागर करती है।बड़ा सवाल: कब सुधरेगी इमरजेंसी सेवा?यह पूरी घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि जब हर सेकंड कीमती होता है, तब एम्बुलेंस जैसी जरूरी सेवाएं समय पर क्यों नहीं पहुंच पातीं?अगर समय पर पुलिस और स्थानीय लोगों की तत्परता नहीं होती, तो इस हादसे का अंजाम और भी गंभीर हो सकता था।रिपोर्ट: विकाश यादव, समाधान इंडिया नेटवर्क)“प्रोटोकॉल टूट सकता है, लेकिन इंसानियत नहीं।”

