
गिरिडीह की ऐतिहासिक भूमि पर आज से 100 साल पहले महात्मा गांधी का आगमन हुआ था। 6-7 अक्टूबर को आगमन के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष में गिरिडीह में शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। इस दौर में गांधी के सिद्धांतों से लोगों को जोड़ना, उनके विचारों को आत्मसात करना महत्वपूर्ण हो चला है, क्योंकि ये दौर तमाम प्रकार के नफरतों के बाजार पर निर्भर हो चला है।*गांधी के नेतृत्व की महत्ता*हम महसूस करते हैं कि 200 सालों की गुलामी के खिलाफ लंबे अरसे तक देशभर के तमाम संगठन को एकता में बंधे रखना कितना चुनौतियों से भरा रहा होगा। आजादी के पूर्व और बाद में जिस प्रकार से हिंसा भड़की, कत्लेआम हुए, उस परिस्थितियों में गांधी जी का नेतृत्व सदैव अमर रहेगा।*गांधी के विचारों की प्रासंगिकता*हम आसपास देखते हैं कि एक असंतुष्ट पुत्र भाई-भाई में घर के बटवारे पर पिता से नाराज हो जाता है, हत्या तक कर दी जाती है। गांधी ने तो पूरे देश को बराबर की दृष्टि से देखा समझा। उनके जैसा शख्सियत आजादी की लड़ाई को इतने लंबे समय तक लड़े और उसे अंतिम रूप तक लेकर गए, यह आज की पीढ़ी को कम से कम गांधी से सीखने की जरूरत है।*मजबूरी और मजबूती*मजबूरी का नाम महात्मा गांधी नहीं हो सकता है, मजबूती का नाम जरूर महात्मा गांधी हो सकता है। गांधी के विचार और नेतृत्व आज भी हमें प्रेरित करते हैं और हमें अपने जीवन में मजबूती और साहस के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
